



रमज़ान में रोज़े छूट जाएं तो क्या करें, कितना फिदिया दें।
अगर आप रमज़ान के किसी दिन रोज़ा नहीं रखते हैं,बीमार हैं या कोई बहन प्रेग्नेंट हैं या उम्र की वजह से सेहत साथ नहीं देती , तो आपको मुआवज़े की शक्ल में छुटे हुए रोज़ों का जल्द से जल्द फिदिया देना चाहिए। फिदिये में इतनी रक़म दें जिस से एक बेहद ज़रूरतमंद गरीब मिस्कीन का एक वक्त का खाना आ जाये। इंडियन मुस्लिम नेटवर्क को इस साल का फिदिया आप यहां दे सकते हैं :
फिदिये का क़ुरान में ज़िक्र :
يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا كُتِبَ عَلَيْكُمُ الصِّيَامُ كَمَا كُتِبَ عَلَى الَّذِينَ مِن قَبْلِكُمْ لَعَلَّكُمْ تَتَّقُونَ
ऐ ईमान लानेवालो! तुमपर रोज़े फ़र्ज़
हैं, जिस तरह तुमसे पहले के लोगों पर फ़र्ज़ किए गए थे । (2:183)
أَيَّامًا مَّعْدُودَاتٍ ۚ فَمَن كَانَ مِنكُم مَّرِيضًا أَوْ عَلَىٰ سَفَرٍ فَعِدَّةٌ مِّنْ أَيَّامٍ أُخَرَ ۚ وَعَلَى الَّذِينَ يُطِيقُونَهُ فِدْيَةٌ طَعَامُ مِسْكِينٍ ۖ فَمَن تَطَوَّعَ خَيْرًا فَهُوَ خَيْرٌ لَّهُ ۚ وَأَن تَصُومُوا خَيْرٌ لَّكُمْ ۖ إِن كُنتُمْ تَعْلَمُونَ
गिनती के कुछ दिनों के लिए – कुछ दिनों तुममें कोई बीमार हो, या सफ़र में हो तो दूसरे दिनों में तादाद पूरी कर ले। और तुम में से जो बीमार हो (ना रख सकता हो) , वो मुहताजों को खाना खिला दे , रोज़ा छोड़ने वालों के जिम्मे एक मुहताज का खाना है, और फिर जो अपनी ख़ुशी से कुछ और नेकी करे तो यह उसी के लिए अच्छा है और तुम रोज़ा रखो तो ये तुम्हारे लिए बेहतर है । (2:184)
रमज़ान में साथ मिलकर नेकियाँ कमाएं।
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