ग़ाज़ा के फ़लस्तीनियों पर तूफ़ानों और बाढ़ की नई आज़माइश
ग़ाज़ा पहले ही ख़राब होते मौसम की मार झेल रहा है।
IMN के मुहम्मद उमर, जो ग़ाज़ा सिटी से रिपोर्ट कर रहे हैं, बताते हैं:
“पिछले 24 घंटों में यहाँ तेज़ हवाएँ, भारी बारिश और बहुत कम तापमान देखा गया। इससे ज़्यादातर बेघर लोगों के कैंप की जगहें कीचड़ भरे पानी के तालाब में बदल गई हैं।”
उन्होंने कहा,
“कुछ इलाक़े पूरी तरह पानी में डूब गए हैं। कई जगहें तेज़ बारिश और गटर (सीवेज) के मिले-जुले पानी से भर गई हैं , जो लोगों के लिए बेहद ख़तरनाक है।”
इन हालात ने पूरे-पूरे ख़ानदानों को मजबूर कर दिया है कि वे अपने टेंटों से गंदा, कीचड़ भरा पानी सिर्फ़ बाल्टी से निकालें ,
और अपने टेंटों को पत्थरों और ईंटों से दबाकर ज़िंदा रखें,
ताकि उनकी थोड़ी-सी बची हुई चीजों को बचाया जा सके।
इसी दौरान एक बेघर फ़लस्तीनी बहन असमा फ़य्याद ने उमर को बताया:
“सारे टेंट तबाह हो चुके हैं। हमारे टेंट तो बस कपड़े के बने हैं। हमारे बच्चे डूब रहे हैं। पहनने के लिए कुछ नहीं, कपड़े तक नहीं बचे।”
हज़ारों टेंट नुक़सान का शिकार
पिछले हफ़्ते UNHCR (United Nations Refugee Agency) ने बताया कि
तेज़ बारिश ने कम से कम 13,000 टेंटों को नुक़सान पहुँचाया है।
मुहम्मद उमर ने कहा:
“इनमें से बहुत-से कैंप खुले मैदानों में लगाए गए थे, या उन तबाह हो चुकी इमारतों के ढेर पर , जो ग़ाज़ा में जंग के दौरान बर्बाद हुई थीं।”




